अब पार्सल भी वंदे भारत जैसी रफ्तार से! जोगेश्वरी-दिल्ली और सूरत-दिल्ली रूट पर फ्रेट EMU का प्रस्ताव

मुंबई। भारतीय रेलवे अब सिर्फ यात्रियों ही नहीं, बल्कि सामान की ढुलाई को भी सुपरफास्ट बनाने की तैयारी में है। पश्चिम रेलवे (WR) ने वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर आधारित नई 'फ्रेट EMU' तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दो नए पार्सल रूट का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड के सामने रखा है। यह जानकारी 20 अगस्त 2026 को पश्चिम रेलवे मुख्यालय से डीएफसीसीआईएल (DFCCIL) और उत्तर रेलवे को भेजे गए पत्र में दी गई है।

क्या है फ्रेट EMU?

फ्रेट EMU एक नई तरह की रेक है, जिसे वंदे भारत जैसी तकनीक पर बनाया गया है, लेकिन यह यात्रियों की जगह उच्च मूल्य वाले समय-संवेदनशील सामान (हाई-वैल्यू टाइम-सेंसिटिव कार्गो) की तेज ढुलाई के लिए डिजाइन की गई है। रेलवे बोर्ड ने मई 2025 में सभी जोनल रेलवे को इस तकनीक के जरिए नए रूट तलाशने के निर्देश दिए थे।

इस रेक की खासियतों में 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की परिचालन गति क्षमता, पैलेट पर रखे कंटेनर की ढुलाई के लिए खास डिजाइन, 1,800 मिमी चौड़े ऑटोमेटिक स्लाइडिंग दरवाजे, और तापमान-संवेदनशील सामान के लिए रेफर कंटेनर लोड करने की सुविधा शामिल है।

पहला प्रस्ताव: जोगेश्वरी-दिल्ली रूट

पहला प्रस्ताव मुंबई के जोगेश्वरी (JOS) से दिल्ली के आदर्श नगर (ANDI) तक साणंद-रेवाड़ी होते हुए डीएफसीसीआईएल (DFCCIL) के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर साप्ताहिक सुपरफास्ट पार्सल सेवा चलाने का है। यह प्रस्ताव मेसर्स हर्ष ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मिला था, जो पिछले 22 वर्षों से भारतीय रेलवे के साथ पार्सल कारोबार में जुड़ी है।

प्रस्तावित समय के अनुसार, यह ट्रेन जोगेश्वरी से सुबह 03:30 बजे रवाना होगी, साणंद पहुंचकर वहां डीएफसी लाइन पर आगे बढ़ेगी और आदर्श नगर पहुंचेगी। हालांकि जोगेश्वरी फिलहाल पार्सल और माल यातायात के लिए बंद है, इसलिए बांद्रा टर्मिनस (BDTS) से इसे शुरू करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

दूसरा प्रस्ताव: सूरत-दिल्ली रूट

दूसरा प्रस्ताव सूरत-दिल्ली रूट पर सप्ताह में तीन दिन 'वंदे भारत फ्रेट EMU' चलाने का है, जो भी जेपीपी-आरसीएस (JPP-RCS) मॉडल पर आधारित होगा। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने प्रस्तावित समय-सारणी, जरूरी रैक की संख्या और संबंधित जोनल रेलवे की सहमति मांगी है।

क्यों अटका हुआ है यह प्रस्ताव?

दोनों प्रस्तावों की राह में कुछ तकनीकी अड़चनें सामने आई हैं। मुंबई सेंट्रल (MMCT) में चल रहे स्टेशन पुनर्विकास कार्य के चलते फिलहाल वहां पिट लाइन उपलब्ध नहीं है, जबकि बांद्रा टर्मिनस पर वायर्ड पिट लाइन की सुविधा ही नहीं है। किले (KILE) और वर्ली (VR) EMU कारशेड में भी सिर्फ 12 से 15 कोच तक के रैक की मेंटेनेंस क्षमता है, जबकि प्रस्तावित फ्रेट EMU रैक में 16 कोच हैं। यही वजह है कि रैक के रखरखाव को लेकर व्यवहार्यता की जांच अभी भी जारी है।

आगे क्या?

पश्चिम रेलवे ने डीएफसीसीआईएल से दोनों प्रस्तावों की जांच कर व्यवहार्य समय-सारणी भेजने का अनुरोध किया है, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। पत्र में साफ कहा गया है कि जब तक पश्चिम रेलवे और डीएफसीसीआईएल दोनों से स्टॉक की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इस ट्रेन को अधिसूचित नहीं किया जा सकता। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती परीक्षण चरण में है, और अंतिम मंजूरी मिलने में कुछ समय लग सकता है।