NJP-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस के समय में बदलाव का प्रस्ताव, मेंटेनेंस की कमी बनी वजह
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने ट्रेन नंबर 12042/12041 न्यू जलपाईगुड़ी-हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस के समय में बदलाव का प्रस्ताव पूर्व रेलवे (ER) को भेजा है। यह ट्रेन एनएफआर के स्वामित्व में है और हफ्ते में छह दिन चलती है। यह प्रस्ताव 27 अगस्त 2026 को भेजा गया है।
क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
इस ट्रेन का प्राइमरी मेंटेनेंस न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) में किया जाता है। किशनगंज मंडल के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (Sr. DME/KIR) ने यह मुद्दा उठाया था कि रेलवे बोर्ड द्वारा शताब्दी ट्रेनों के लिए तय मेंटेनेंस पैटर्न के अनुसार एनजेपी में रैक को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।
मौजूदा समय के अनुसार ट्रेन रात 22:50 बजे एनजेपी पहुंचती है, जिसके बाद रैक की पिट जांच आधी रात 00:00 बजे से शुरू हो पाती है, वो भी तभी जब ट्रेन समय पर पहुंचे। लेकिन एनजेपी से अगली सुबह 05:30 बजे ही ट्रेन को फिर रवाना होना होता है। इससे आरपीसी-4 मानक के तहत तय पिट जांच के लिए जरूरी समय सीमा काफी कम हो जाती है।
क्या है प्रस्तावित नया समय?
प्रस्ताव के अनुसार, ट्रेन नंबर 12042 अब न्यू जलपाईगुड़ी से सुबह 06:00 बजे रवाना होगी और मालदा टाउन होते हुए दोपहर 13:45 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 12041 हावड़ा से दोपहर 14:15 बजे रवाना होकर मालदा टाउन होते हुए रात 22:00 बजे न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचेगी।
रेलवे का कहना है कि बर्धमान (BWN) से हावड़ा (HWH) के बीच के 95 किलोमीटर के हिस्से पर सेक्शन की गति सीमा 130 किलोमीटर प्रति घंटे है, इसलिए इस सेक्शन की रफ्तार का फायदा उठाकर नया समय तैयार किया गया है।
किस शर्त पर लागू होगा यह बदलाव?
यह नया समय तभी लागू हो सकेगा जब मालदा टाउन (MLDT) पर ट्रेन नंबर 13054 राधिकापुर-हावड़ा कुलिक एक्सप्रेस और 12042 शताब्दी एक्सप्रेस के मौजूदा समय आपस में अदला-बदली कर दिए जाएं। यानी 12042 शताब्दी एक्सप्रेस को मालदा टाउन पर 13054 कुलिक एक्सप्रेस के मौजूदा समय पर हैंडओवर किया जाएगा, और 13054 कुलिक एक्सप्रेस को 12042 के मौजूदा समय पर। वापसी यात्रा में भी 12041 हावड़ा-एनजेपी शताब्दी एक्सप्रेस का रास्ता मालदा टाउन से एनजेपी तक इसी नई व्यवस्था के तहत एनएफआर सिस्टम को सौंपे जाने पर उपलब्ध होगा।
आगे क्या?
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने पूर्व रेलवे से इस मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है, ताकि ट्रेन के सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई हो सके। यानी अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, इसे लागू करने से पहले पूर्व रेलवे की सहमति जरूरी होगी।
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